Thursday, September 26, 2019

 शीर्षक–  ‘धुंधली यादें'

 “तेरे यादों के अल्हड़पन में
धुंधली रेखाऐं छाई हैं
 यादों के उस पल में अब
हृदय भी रुक-रुक कर चमके हैं
जैसें हो इंद्रधनुष का रंग कोई
नींदों में अब मेरे तेरा स्वप्न  नहीं आता
बस  कुछ बुदबुदाहट के स्वर आते
 अब वह उन्माद  प्रलय  नहीं आता
 बस  धीमा सा स्पंदन तेरा रूह को छू जाता
अब मानों! जीवन की नीरसता ही 
लघु कंपन लेकर आई हैं
 मधु प्रभात का पता नहीं
किन्तु
तेरे यादों के सुखमय पल में अब
थोड़ी  धुंधलाहट की स्मृति छाई हैं।
लगता हैं
इस करुणामय ह्रदय में अब
थोड़ी –थोड़ी सी तरुणाई आई हैं
क्योंकि ?
तेरे यादों के अल्हड़पन में
थोड़ी –थोड़ी धुधली रेखाऐं छाई है।।"

रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश।

Thursday, September 19, 2019

शीर्षक   –     ‘अश्रु वन्दना'

"हैं नमन तुम्हें भी ,अश्रु वन्दना से 
आॅऺखों के अश्रु बोले, साॅ॑सो की आहटें
 फिर आज तुम्हें पढ़ लिया, अश्रु वन्दना से 
तेरे जाने का डर, आहटें पहचान लिया 
तेरे मौंन के दीपक में, दर्पण भी देख लिया  
बिष का प्याला तेरी ,यादों में पी लिया
 कर लिया फिर नमन , तुम्हें अश्रु वन्दना से ।

साॅ॑सो की झंकार छूटी, फूलों सी मुस्कान छूटी
 स्वाति के बूॅ॑दों जैसें ,फिर तुम्हें पुकार लिया 
स्वप्न कथा में पूरा, तेरे संग  जी लिया
  अमृत का प्याला मान, यादों को पी लिया
  रोम-रोम अर्पण किया, तेरे हर कदमों पर 
आॅ॑खें फिर बंद कर लिया,  अश्रु वन्दना से।
हैं नमन तुम्हें भी , अश्रु वन्दना से।।"

रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

अश्रु वन्दना

शीर्षक   –     ‘अश्रु वन्दना'

"हैं नमन तुम्हें भी ,अश्रु वन्दना से
आॅऺखों के अश्रु बोले, साॅ॑सो की आहटें
 फिर आज तुम्हें पढ़ लिया, अश्रु वन्दना से
तेरे जाने का डर, आहटें पहचान लिया
तेरे मौंन के दीपक में, दर्पण भी देख लिया 
बिष का प्याला तेरी ,यादों में पी लिया
 कर लिया फिर नमन , तुम्हें अश्रु वन्दना से ।

साॅ॑सो की झंकार छूटी, फूलों सी मुस्कान छूटी
 स्वाति के बूॅ॑दों जैसें ,फिर तुम्हें पुकार लिया
स्वप्न कथा में पूरा, तेरे संग  जी लिया
  अमृत का प्याला मान, यादों को पी लिया
  रोम-रोम अर्पण किया, तेरे हर कदमों पर
आॅ॑खें फिर बंद कर लिया,  अश्रु वन्दना से।
हैं नमन तुम्हें भी , अश्रु वन्दना से।।"

रेशमा त्रिपाठी
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश